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सोनू त्यागी का राहुल गांधी के ‘80% भारतीय नॉन-वेज’ और ‘नॉन-वेज खाना स्वादिष्ट है’ बयान पर कड़ा जवाब

स्वाद जीवन से बड़ा नहीं हो सकता”: गो स्पिरिचुअल के संस्थापक ने अहिंसा, करुणा और हर जीव के प्रति सम्मान की अपील की

मुंबई/नई दिल्ली: अवार्ड-विनिंग लेखक, निर्देशक और निर्माता तथा गो स्पिरिचुअल और अप्रोच एंटरटेनमेंट ग्रुप के संस्थापक सोनू त्यागी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के “80% भारतीय नॉनवेज हैं और भारत का नॉनवेज खाना स्वादिष्ट है वाले बयान पर कड़ा जवाब दिया है। सोनू त्यागी ने कहा कि भारत जैसे विशाल और अलग-अलग खान-पान की परंपराओं वाले देश को केवल 80% के एक आंकड़े में समेटना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि खाने का स्वाद किसी जीव के जीवन से बड़ा नहीं हो सकता।

राहुल गांधी ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान परोसे गए शाकाहारी खाने को लेकर चल रही चर्चा के बीच यह बयान दिया। इस पर सोनू त्यागी ने कहा कि इस मुद्दे को केवल राजनीति के नजरिए से नहीं, बल्कि तथ्यों, भारत की आध्यात्मिक परंपराओं, अहिंसा और पशुओं के प्रति करुणा के नजरिए से भी देखने की जरूरत है।

सोनू त्यागी ने कहा, “80% भारतीय नॉनवेज हैं, यह आंकड़ा आखिर आया कहां से? भारत बहुत बड़ा और विविध देश है। यहां हर राज्य, हर क्षेत्र और यहां तक कि अलगअलग परिवारों की खाने की आदतें अलग हैं। भारत को केवल एक आंकड़े से नहीं समझा जा सकता। इसी तरह नॉनवेज खाना स्वादिष्ट है किसी व्यक्ति की अपनी पसंद हो सकती है, लेकिन इसे हर भारतीय की पसंद नहीं कहा जा सकता।

उपलब्ध सर्वे के आंकड़े भी भारत की खाने की आदतों की अलग तस्वीर दिखाते हैं। प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा 29,999 भारतीय वयस्कों पर किए गए राष्ट्रीय सर्वे के अनुसार 39% भारतीयों ने खुद को शाकाहारी बताया। सर्वे में यह भी सामने आया कि 81% भारतीय किसी किसी रूप में मांस खाने पर रोक या सीमा रखते हैं। वे या तो पूरी तरह शाकाहारी हैं, कुछ प्रकार का मांस नहीं खाते या कुछ खास दिनों में मांसाहार नहीं करते। हिंदुओं में 44% लोगों ने खुद को शाकाहारी बताया, जबकि 83% हिंदू या तो शाकाहारी हैं या किसी किसी रूप में मांस खाने पर रोक रखते हैं।

सोनू त्यागी ने कहा, कोई व्यक्ति खुद को पूरी तरह शाकाहारी नहीं बताता, इसका मतलब यह नहीं कि वह रोज नॉनवेज खाता है। भारत में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जिनका रोज का भोजन शाकाहारी है, लेकिन वे कभीकभी नॉनवेज खाते हैं। करोड़ों लोग धार्मिक दिनों, व्रत, त्योहारों और खास अवसरों पर नॉनवेज नहीं खाते। ऐसे सभी लोगों को एक साथ जोड़कर ‘80% नॉनवेज भारत कहना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।

उन्होंने कहा कि इस बहस को हिंदू और सनातन धर्म की आध्यात्मिक परंपराओं के नजरिए से भी समझना चाहिए। हिंदू समाज में अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी भोजन परंपराएं हैं और इस विविधता का सम्मान होना चाहिए। लेकिन इसके साथ ही अहिंसा, करुणा, दया, सात्विक भोजन, व्रत, शाकाहारी प्रसाद और हर जीव के प्रति सम्मान हिंदू और सनातन परंपरा में गहराई से जुड़े हुए हैं।

सोनू त्यागी ने कहा, हिंदू और सनातन धर्म हमें केवल पूजापाठ नहीं सिखाते, बल्कि दया, करुणा और अहिंसा भी सिखाते हैं। हमारी आध्यात्मिक परंपरा हमें अपने साथसाथ दूसरे जीवों के जीवन का भी सम्मान करना सिखाती है। अलगअलग भोजन परंपराओं का सम्मान होना चाहिए, लेकिन अहिंसा और करुणा जैसे मूल आदर्शों को भी नहीं भूलना चाहिए।

राहुल गांधी के नॉनवेज खाना स्वादिष्ट है वाले बयान पर सोनू त्यागी ने कहा, स्वाद जीवन से बड़ा नहीं हो सकता। कोई चीज हमें स्वादिष्ट लग सकती है, लेकिन हमें यह भी सोचना चाहिए कि उस स्वाद के लिए किसी दूसरे जीव ने क्या कीमत चुकाई। क्या हमारी जीभ के कुछ मिनट के स्वाद के लिए किसी जानवर का पूरा जीवन खत्म हो जाना चाहिए? पशुओं को भी दर्द होता है, उन्हें भी डर लगता है और वे भी जीना चाहते हैं।

Sonu Tyagi

उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे समृद्ध शाकाहारी भोजन परंपराओं में से एक है। देश के अलग-अलग हिस्सों में सब्जियों, दालों, अनाज, मोटे अनाज, फलों, दूध से बने खाद्य पदार्थों और सात्विक भोजन की हजारों स्वादिष्ट चीजें उपलब्ध हैं।

सोनू त्यागी ने कहा, दुनिया के नेताओं को शाकाहारी भोजन परोसने पर भारत को शर्मिंदा होने की क्या जरूरत है? हमें तो इस पर गर्व होना चाहिए। भारत बिना किसी जीव की जान लिए दुनिया को शानदार और स्वादिष्ट भोजन परोस सकता है। यह हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और भोजन परंपरा की ताकत है।

उन्होंने साफ किया कि गो स्पिरिचुअल किसी व्यक्ति पर शाकाहार थोपने में विश्वास नहीं करता। सोनू त्यागी ने कहा, हम समझाते हैं, थोपते नहीं। हम अपील करते हैं, धमकी नहीं देते। केवल शाकाहारी होने से कोई इंसान अपने आप अच्छा नहीं बन जाता और नॉनवेज खाने वाले व्यक्ति से नफरत करना या उसका अपमान करना भी सही नहीं है। लेकिन अपनी पसंद की आजादी का मतलब यह नहीं है कि हम अपने खाने से जुड़े नैतिक सवालों पर बात ही करें।

अपने गो वेज अभियान के माध्यम से गो स्पिरिचुअल शाकाहार, अहिंसा, पशुओं के प्रति दया और करुणा को जागरूकता के जरिए बढ़ावा दे रहा है।

सोनू त्यागी ने कहा, मान लीजिए कि 80% वाला आंकड़ा सही भी हो, तब भी क्या ज्यादा लोगों के किसी चीज को करने से वह सही और करुणामय हो जाती है? नैतिकता का फैसला प्रतिशत से नहीं होता। जब हमारे पास ऐसे भोजन के विकल्प मौजूद हैं जिनके लिए किसी जानवर की जान नहीं जाती, तो हमें करुणा वाले विकल्प के बारे में जरूर सोचना चाहिए।

उन्होंने कहा, राहुल गांधी को अपनी पसंद का खाना खाने का पूरा अधिकार है, जैसे हर भारतीय को है। लेकिन भारत केवल ‘80% नॉनवेज का आंकड़ा नहीं है। भारतीय भोजन केवल मांसाहार नहीं है। और सबसे बड़ी बातजीवन स्वाद से बड़ा है। किसी जानवर का पूरा जीवन हमारी जीभ के कुछ मिनट के स्वाद से कहीं ज्यादा कीमती है। जहां हमारे पास विकल्प हो, वहां हमें करुणा को चुनना चाहिए।

सोनू त्यागी एक अवार्डविनिंग लेखक, निर्देशक और निर्माता तथा गो स्पिरिचुअल और अप्रोच एंटरटेनमेंट ग्रुप के संस्थापक हैं। उन्हें मीडिया, पत्रकारिता, विज्ञापन, जनसंपर्क, फिल्म और मनोरंजन के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। वे अध्यात्म, मानवता, शाकाहार, अहिंसा, पशुओं के प्रति करुणा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लगातार आवाज उठाते रहे हैं। उनका मानना है कि अध्यात्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन और हर जीव के प्रति हमारे व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए। सोनू त्यागी

गो स्पिरिचुअल एक आध्यात्मिक और स्वास्थ्य संगठन है, जो अध्यात्म, परोपकार और सामाजिक कार्य, आध्यात्मिक जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य, आयुर्वेद और प्राकृतिक जीवन, आध्यात्मिक पर्यटन, मीडिया और आयोजनों के क्षेत्र में काम करता है। अपने गो वेज अभियान के माध्यम से संगठन शाकाहार, अहिंसा, पशुओं के प्रति दया और जागरूक जीवनशैली को बढ़ावा दे रहा है। गो स्पिरिचुअल न्यूज़ मैगज़ीन एवं ऐप के माध्यम से संगठन अध्यात्म, स्वास्थ्य, मानवता और सकारात्मक सामाजिक बदलाव से जुड़ी सामग्री लोगों तक पहुंचा रहा है।

सोनू त्यागी द्वारा स्थापित अप्रोच एंटरटेनमेंट ग्रुप एक अवार्ड-विनिंग मनोरंजन, मीडिया और संचार समूह है। अप्रोच एंटरटेनमेंट सेलिब्रिटी एवं टैलेंट मैनेजमेंट, फिल्म निर्माण, विज्ञापन एवं कॉरपोरेट फिल्म निर्माण, फिल्म मार्केटिंग, आयोजन और एंटरटेनमेंट मार्केटिंग के क्षेत्र में काम करता है। अप्रोच कम्युनिकेशंस एक अवार्ड-विनिंग जनसंपर्क, डिजिटल और इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशंस एजेंसी है, जबकि अप्रोच बॉलीवुड एक बॉलीवुड एवं एंटरटेनमेंट न्यूज़वायर, पोर्टल और ऐप है।

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