

दमोह (मध्य प्रदेश) – जब पूरा शहर 44-45 डिग्री की भीषण गर्मी में तप रहा है, तब कुछ संवेदनशील हृदय ऐसे भी हैं जो बेजुबान पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए सूरज की तपिश में उतर आए। टीम उम्मीद ने “मिट्टी का सकोर – जीवन की डोर” नामक एक अत्यंत प्रेरणादायक अभियान शुरू किया है, जो न केवल प्रकृति के प्रति करुणा दर्शाता है बल्कि आध्यात्मिक मूल्यों – सेवा, संवेदना और जीव-जंतुओं के प्रति स्नेह – को भी जीवंत करता है।
रविवार सुबह 7 बजे बेलाताल पार्क में टीम उम्मीद के स्वयंसेवकों ने पेड़ों की डालियों पर मिट्टी के सकोर लटकाए और उनमें ताज़ा पानी भर दिया। गर्मी से व्याकुल पक्षी इन सकोरों के आस-पास पहुंचकर अपनी प्यास बुझा सकें, यही उद्देश्य है। टीम का लक्ष्य पूरे दमोह शहर में कम से कम 1000 सकोर लगाना है, ताकि अधिक से अधिक पक्षियों को राहत मिल सके।

टीम उम्मीद के प्रमुख और स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर श्री हरीश पटेल ने बताया, “भीषण गर्मी में इंसान एसी और कूलर में बैठकर परेशान है, तो खुले आसमान के नीचे रहने वाले पक्षियों की क्या दशा होगी? कई बार छोटे पक्षी गर्मी से बेहाल होकर गिर जाते हैं। यही सोचकर हमने यह अभियान शुरू किया। मिट्टी का सकोर न सिर्फ पानी देता है, बल्कि जीवन की डोर भी बन जाता है।”
यह अभियान केवल एक दिन का नहीं है। टीम ने संकल्प लिया है कि हर दिन कहीं न कहीं सकोर लगाए जाएंगे और लोगों को भी प्रेरित किया जाएगा कि वे अपने घरों की छतों, बालकनियों और आस-पास के पेड़ों पर पानी के पात्र रखें।
जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक श्री सुशील नामदेव ने कहा, “भीषण गर्मी में प्रकृति और बेजुबान जीवों का ध्यान रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। जल की व्यवस्था करके हम न केवल उनकी जान बचा सकते हैं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपना स्नेह भी व्यक्त कर सकते हैं।”
टीम उम्मीद की महिला सदस्य नैंसी जाटव ने अपील की कि जो भी व्यक्ति इस नेक कार्य में सहयोग करना चाहे, सकोर दान कर सकता है। टीम स्वयं उन्हें विभिन्न स्थानों पर लगाकर पक्षियों तक पहुंचा देगी।

अभियान में राकेश राठौर, धर्मेंद्र सोनी, शिवम सोनी, महेंद्र सिंह लोधी, जितेंद्र अहिरवाल, माधव पटेल, बृजेश सेन, महेंद्र ताम्रकार, कृष्णा पटेल, अंकित लहरी, विशाल पालीवाल, शंकर गौतम सहित कई अन्य स्वयंसेवक और स्थानीय अधिकारी शामिल रहे।
स्थानीय नागरिकों ने इस पहल की भरपूर सराहना की। एक नागरिक ने कहा, “एक छोटा सा सकोर… किसी पक्षी की जिंदगी बचा सकता है।”
Go Spiritual की दृष्टि में यह अभियान केवल पक्षी-सेवा नहीं, बल्कि जीव-दया और कर्मयोग का सुंदर उदाहरण है। जब मनुष्य अपने आस-पास के जीवों के प्रति संवेदनशील होता है, तब वह सच्चे आध्यात्मिक पथ पर चल रहा होता है। मिट्टी के इन सकोरों के माध्यम से टीम उम्मीद न केवल प्यास बुझा रही है, बल्कि समाज के हृदय में करुणा की नई लहर भी पैदा कर रही है।
“जो प्राणी की रक्षा करता है, भगवान उसकी रक्षा करते हैं।” टीम उम्मीद का यह अभियान इसी सनातन सत्य को याद दिलाता है।
Go Spiritual News Magazine & App सभी पाठकों से अपील करता है कि अपने क्षेत्र में भी ऐसी छोटी-छोटी पहल शुरू करें। एक सकोर, एक बूंद पानी और एक संवेदनशील हृदय – यही तो सच्ची आध्यात्मिकता है।
